कच्चे तेल में लगातार चौथे दिन गिरावट, ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के नीचे; रुपया 29 पैसे मजबूत

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वैश्विक कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड टूटकर 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) भी 87 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत और ईरान के साथ संभावित तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों पर भारी दबाव बनाया है।

दूसरी ओर, भारतीय रुपया लगातार पांचवें सत्र में मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। बुधवार को 94.64 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद होने के बाद, रुपया गुरुवार को 29 पैसे की बढ़त के साथ 94.35 प्रति डॉलर पर खुला।

भू-राजनीतिक जोखिम कम होने से घटीं कीमतें

बाजार में सबसे बड़ी चिंता का कारण रहे पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक जोखिमों का असर अब कम होता दिख रहा है। निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ आक्रामक सैन्य रुख अपनाना कठिन हो सकता है। इससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है और तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम (risk premium) कम हुआ है।

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.36 प्रतिशत टूटकर 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले दोनों बेंचमार्क बुधवार को 8 प्रतिशत से अधिक टूटे थे और अगस्त के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर बंद हुए थे।

इस सप्ताह अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है, जो हाल के वर्षों की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावटों में से एक है।

कूटनीतिक समाधान और आपूर्ति में सुधार

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी युद्ध की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी प्रशासन पर कूटनीतिक राह चुनने का दबाव बढ़ा है, जिससे बाजार में बिकवाली तेज हुई।

इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लगभग युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है, जिससे वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं दूर हो रही हैं।

भंडार और मांग की स्थिति

हालांकि, प्रमुख उपभोक्ता देशों में वाणिज्यिक तेल भंडार पिछले 15 वर्षों के निचले स्तर के करीब हैं। अमेरिका में भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल, पेट्रोल और डिस्टिलेट के भंडार घटे हैं, जबकि मांग एक साल के उच्च स्तर पर पहुंची है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कच्चे तेल में यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, इस पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।

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