केंद्र सरकार ने नियमों में दी ढील, कुछ खास श्रेणियों के विदेशी नागरिकों और शरणार्थियों के लिए पासपोर्ट-वीजा की छूट

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केंद्र सरकार ने देश में रह रहे कई श्रेणियों के विदेशी नागरिकों, अल्पसंख्यक शरणार्थियों, पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों के लिए पासपोर्ट और वीजा आवश्यकताओं में ढील दी है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (एग्जेंप्शन) (अमेंडमेंट) ऑर्डर, 2026 को आधिकारिक राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचित किया है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले ‘वीजा मैनुअल’ की एक नई परिभाषा शामिल की गई है।

प्रमुख रियायतें और प्रावधान:

  • नेपाल और भूटान यात्रा: भूमि या हवाई मार्ग से नेपाल और भूटान जाने वाले भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट की अनिवार्यता से छूट होगी, बशर्ते वे इमिग्रेशन अधिकारी को ‘वीजा मैनुअल’ में निर्दिष्ट कोई भी एक वैध पहचान पत्र दिखा सकें। यही नियम भारत में प्रवेश करने या बाहर जाने वाले नेपाल और भूटान के नागरिकों पर भी लागू होगा।

  • श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी: 9 जनवरी 2015 तक भारत में शरण लेने वाले पंजीकृत श्रीलंकाई तमिल नागरिकों को भी छूट वाली श्रेणी में शामिल किया गया है।

  • सशस्त्र बल और सैन्य दल: सरकारी परिवहन से आधिकारिक ड्यूटी पर यात्रा करने वाले भारतीय नौसेना, सेना और वायु सेना के सदस्य तथा उनके परिवार के सदस्य इसमें शामिल हैं। इसके अलावा मरम्मत के लिए भारत आने वाले सैन्य जहाजों के विदेशी क्रू सदस्यों को वैध सैन्य पहचान पत्र और मिलिट्री शिप रिपेयर परमिट के आधार पर छूट मिलेगी।

  • अल्पसंख्यक शरणार्थी: अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के वे लोग, जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आए थे, उन्हें पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से छूट दी गई है। हालांकि, भारत में बने रहने के लिए उन्हें उचित श्रेणी का वीजा प्राप्त करना होगा।

  • पाकिस्तानी व अन्य विशेष नागरिक:

    • 31 दिसंबर 2009 को या उससे पहले स्थायी रूप से रहने के इरादे से भारत आए वे पाकिस्तानी नागरिक, जो पाकिस्तान द्वारा जारी कम्प्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) न होने के कारण अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं करा सके।

    • मुस्लिम समुदाय के वे पुरुष, जो मूल रूप से भारतीय नागरिक थे, 15 अगस्त 1947 से 31 दिसंबर 1965 के बीच पाकिस्तान गए और 31 दिसंबर 2009 को या उससे पहले भारत लौट आए।

    • मलेशियाई या सिंगापुर की नागरिकता हासिल करने वाले भारतीय मूल के वे लोग, जो 31 दिसंबर 2009 को या उससे पहले एक्सपायर हो चुके पासपोर्ट पर भारत लौटे थे और उनका नवीनीकरण नहीं हो सका था।

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